वृक्षसंवर्धन(अभंग क्र.१२)
वृक्षसंवर्धन | चला रे करूया |
झाडेच लावूया | खूप सारे ||
चला झाडे लावू | झाडे जगवूया |
पाणीही घालूया | सदोदित ||
वृक्षवल्ली आम्हां | सोयरे सकळ |
देत असे फळ | झाडे सदा ||
वृक्षालागवड | आवर्जून करा |
पावसाच्या धारा | येतीलच ||
निसर्गाशी नाते | चला ना जोडूया||
झाडे वाढवूया | खूप खूप ||
शुद्ध हवा देती | प्राणवायू देती |
फळे फुले देती | सदानंद ||
अनमोल आहे | वृक्षाची सावली ||
ही मायमाऊली | सजीवांची ||
भरपूर पाणी | मंजुळ ती गाणी ||
ऐकू येई कानी | आपोआप ||
आवर्षण टाळू | बदलेल रूप ||
जमिनीची धूप | मिटेल हो ||
पक्ष्यांचा निवारा | फळे फुले मध |
मिळेल औषध | सर्वांसाठी ||
मिनु म्हणे आता | झाडे लावू चला |
माणूस तो भला | जगाचिया ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
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