मिनू
Friday, December 30, 2022
Thursday, December 8, 2022
माणुसकी भली (अभंग क्र.३३)
माणुसकी भली (अभंग क्र.३३)
माणुसकी भली| ठेव जरा अंगी|
नाव निघे जगी | सदाचारी ||
विवेक विचार | खरे शिल्पकार |
देतसे आकार | जीवनाला ||
संवेदनशील | असू द्यावे मन |
खरे तेच धन | आयुष्याचे ||
संस्कार सुरेख | घडविते मूल ||
बागेतले फूल | जणू काही ||
सदाचार ठेवा | संस्कृतीचा मेवा |
आईबाप सेवा | खरा धर्म ||
जगात कमव | इभ्रतीला जप |
करूनिया तप | विवेकाने ||
प्राणीमात्रांवर | दया हो करावी |
माणुसकी दावी | जगाचिया ||
दानधर्म करा | अतिथी म्हणून |
देवच मानून | सदाशिव ||
मुखी पांडुरंग | नाम घ्या हरीचे |
कोडे जिवनाचे | सुटेल गा ||
मिनू म्हणे आता | वाचवा हो मुली |
माणुसकी भली | खरोखर ||
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.
आनंदाने जगा (अभंग क्र.३२)
जन्म मानवाचा (अभंग क्र.३२)
पुण्याईने मिळे | जन्म मानवाचा |
अर्थ जिवनाचा | कळला का ||
व्यर्थ जाऊ नये | जन्म हा आपुला ||
माणूस तो भला | समजावा ||
किर्तीरूपे झिज | चंदनासमान |
जणू तू सूमन | सुवासिक ||
येईल सुगंध | संस्कार सुरेख |
कर तू पालक | स्वतः चीही ||
जाता जाता थोडे | पुण्य ठेव मागे |
सुखाचे ते धागे | हाती लागे ||
लोभ,राग, द्वेष | दे रे सोडूनिया |
मर्म जाणुनिया | घे माणसा ||
सोबत संगत | चांगली असावी |
छबी ती दिसावी | ईशरूपी ||
चांगले चिंतन | असू दे रे मनी |
सुखाची पर्वणी | तूज मिळे ||
सत्कर्म करावे | कष्ट उपसावे |
प्रेमाने रहावे | जिवनात ||
मिनू म्हणे आता | चांगले ते घ्यावे |
आनंदी रहावे | जिवनात ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.
जन्म मानवाचा (अभंग क्र.३१)
जन्म मानवाचा (अभंग क्र.३१)
पुण्याईने मिळे | जन्म मानवाचा |
अर्थ जिवनाचा | कळला का ||
व्यर्थ जाऊ नये | जन्म हा आपुला ||
माणूस तो भला | समजावा ||
किर्तीरूपे झिज | चंदनासमान |
जणू तू सूमन | सुवासिक ||
येईल सुगंध | संस्कार सुरेख |
कर तू पालक | स्वतः चीही ||
जाता जाता थोडे | पुण्य ठेव मागे |
सुखाचे ते धागे | हाती लागे ||
लोभ,राग, द्वेष | दे रे सोडूनिया |
मर्म जाणुनिया | घे माणसा ||
सोबत संगत | चांगली असावी |
छबी ती दिसावी | ईशरूपी ||
चांगले चिंतन | असू दे रे मनी |
सुखाची पर्वणी | तूज मिळे ||
सत्कर्म करावे | कष्ट उपसावे |
प्रेमाने रहावे | जिवनात ||
मिनू म्हणे आता | चांगले ते घ्यावे |
आनंदी रहावे | जिवनात ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.
होऊ नये लाचार (अभंग क्र.३०)
*होऊ नये रे लाचार*. (अभंग क्र.३०)
स्वाभिमानी रहा | होऊ नये लाचार |
चांगले आचार | असावेत || १||
अति शिष्टाचार | मती ती खुंटते |
हेवेदावे होते | आपोआप ||२||
कर्म हीच पुजा | सत्य हाच धर्म |
जीवनाचे मर्म | ठेव ध्यानी ||३||
अतिहव्यासाला | पडू नका बळी |
लोभाची ती अळी | वळवळे ||४||
जे आहे त्यातच | समाधानी रहा |
निरखूनी पहा | जिवनाला ||५||
कष्टाची ती फळे | गोड असतात |
सदा पुरतात| आयुष्यात ||६||
मेंदू हा आपला | रहावे सजग |
पहावे ते जग | विवेकाने ||७||
नको फुशारकी | बाप जिवावर |
उभा पायावर | दाखव गा ||८||
सत्याची ती कास | सोडू नको कधी |
विचार हा आधी | करावेच ||९||
लाचार आयुष्य | तू दे गा सोडून |
कंबर कसून | सज्ज रहा ||१०||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
मो. ९७६७६६३२५७
जिद्द हो असावी (अभंग क्र.२९)
जिद्द हो असावी (अभंग क्र.२९)
संकटात सदा | हिंमत असावी|
भितीही नसावी | कशाचीही ||
जिद्द हो असावी | अभ्यासाचा ध्यास |
सुखाचा प्रवास | होईल गा ||
नको हार मानू | खचू नको कधी
संकट रे मधी | येतातच ||
अपयश हीच | यशाची पायरी |
ध्येय ठेव उरी | जिवनात
खूणगाठ बांध | निश्चयाने दृढ |
यशाचे ते गूढ | ठेव ध्यानी ||
आळस हा वैरी |आहे माणसाचा |
बदल हा ढाचा | आयुष्याचा ||
मेहनत कर | अभ्यास करावा |
पर्वत गाठावा | यशाचा हो ||
मनन चिंतन | करीत जा थोडे |
आयुष्याचे कोडे | सुटेल गा ||
तनमनधन | द्यावे ना झोकून |
हळूच वाकून | यश येईल ||
यशाची पायरी | गाठायची आहे
खस्ता खात राहे | जीवनात |
जिद्द हो असावी | मानू नये हार |
जिवनाचे सारं | मिनू म्हणे ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.
मो.९७६७६६३२५७
निरोगी जीवन (अभंग क्र.२८)
निरोगी जीवन (अभंग क्र.२८)
लवकर उठे | लवकर निजे |
माणूस तो साजे | जीवनात ||
प्रांत:समयीला | व्यायाम करावे |
नित्यची फिरावे | दररोज ||
आळस हा शत्रू | आहे माणसाचा |
बदलतो साचा | जिवनाचा ||
चांगल्या सवयी | तेवढे चांगले |
होईल गा भले | आयुष्याचे ||
सोड रे व्यसन | व्याधी आमंत्रण |
शरीर खंगून | जाईल गा ||
सात्विक आहार | निरोगी आयुष्य ||
उद्याचे भविष्य | आयुष्याचे ||
प्रसन्न मनाने | रहा दिनभर |
नको चिंतातूर | आयुष्यात ||
मानवाचा जन्म | सुंदर ही भेट |
देवाने ही थेट | दिली आहे ||
गोळ्या व औषधी | खरे शत्रू आहे |
डोकावून पाहे | जीवनात ||
निरोगी जीवन | स्वस्थ जगूयात |
रोगावर मात | करूयात ||
ताजे खाणेपिणे |उत्तम आहार |
कामं अंगभर | करूनिया ||
मिनू म्हणे आता | ठेव सर्व ध्यानी |
नको मनमानी | आपुलीच ||
दिर्घायुष्यी जगा | नियम हे पाळा |
आयुष्य झोपाळा | आहे बघ ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
मो.९७६७६६३२५७
कर्तव्याची जाण (अभंग क्र.२७)
कर्तव्याची जाण (अभंग क्र.२७)
कर्तव्याची जाण | माणसा तू ठेव |
कशाचे ना भेव राहील गा|
मायबाप पूजा | देवाआधी थोर |
वृध्दपणी घोर | कशापायी ||
भावनेपेक्षाही | मोठेच कर्तव्य ||
नको अपव्यय | वेळेचाही ||
राष्ट्रप्रेम उरी | माणुसकी भली |
परस्त्री मुली | ताईसम ||
नको लवलेश | कधी भ्रष्टाचार |
नको स्वैराचार | ठेव ध्यानी ||
नात्यांची ती घट्ट | वीण मजबूत |
कुटुंब शाबूत | असेल गा ||
सोड हेवेदावे | उगा मिरवावे |
आपलेच गावे | कशापायी ||
इमानदारीने | सदाच रहावे |
धन्य हो पावावे | जीवनात ||
स्वाभिमानी रहा | सदैव तत्पर |
बदल लकेर | नशिबाची ||
प्रयत्नांती भेटे | तो परमेश्वर|
जीवन नश्वर | ठेव ध्यानी ||
मिनू म्हणे ठेव | कर्तव्याची जाण |
जीवन महान | होईल गा ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
मो.९७६७६६३२५७
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