स्वाभिमानी रहा | होऊ नये लाचार |
चांगले आचार | असावेत || १||
अति शिष्टाचार | मती ती खुंटते |
हेवेदावे होते | आपोआप ||२||
कर्म हीच पुजा | सत्य हाच धर्म |
जीवनाचे मर्म | ठेव ध्यानी ||३||
अतिहव्यासाला | पडू नका बळी |
लोभाची ती अळी | वळवळे ||४||
जे आहे त्यातच | समाधानी रहा |
निरखूनी पहा | जिवनाला ||५||
कष्टाची ती फळे | गोड असतात |
सदा पुरतात| आयुष्यात ||६||
मेंदू हा आपला | रहावे सजग |
पहावे ते जग | विवेकाने ||७||
नको फुशारकी | बाप जिवावर |
उभा पायावर | दाखव गा ||८||
सत्याची ती कास | सोडू नको कधी |
विचार हा आधी | करावेच ||९||
लाचार आयुष्य | तू दे गा सोडून |
कंबर कसून | सज्ज रहा ||१०||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
मो. ९७६७६६३२५७
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