कर्तव्याची जाण (अभंग क्र.२७)
कर्तव्याची जाण | माणसा तू ठेव |
कशाचे ना भेव राहील गा|
मायबाप पूजा | देवाआधी थोर |
वृध्दपणी घोर | कशापायी ||
भावनेपेक्षाही | मोठेच कर्तव्य ||
नको अपव्यय | वेळेचाही ||
राष्ट्रप्रेम उरी | माणुसकी भली |
परस्त्री मुली | ताईसम ||
नको लवलेश | कधी भ्रष्टाचार |
नको स्वैराचार | ठेव ध्यानी ||
नात्यांची ती घट्ट | वीण मजबूत |
कुटुंब शाबूत | असेल गा ||
सोड हेवेदावे | उगा मिरवावे |
आपलेच गावे | कशापायी ||
इमानदारीने | सदाच रहावे |
धन्य हो पावावे | जीवनात ||
स्वाभिमानी रहा | सदैव तत्पर |
बदल लकेर | नशिबाची ||
प्रयत्नांती भेटे | तो परमेश्वर|
जीवन नश्वर | ठेव ध्यानी ||
मिनू म्हणे ठेव | कर्तव्याची जाण |
जीवन महान | होईल गा ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
मो.९७६७६६३२५७
No comments:
Post a Comment