निरोगी जीवन (अभंग क्र.२८)
लवकर उठे | लवकर निजे |
माणूस तो साजे | जीवनात ||
प्रांत:समयीला | व्यायाम करावे |
नित्यची फिरावे | दररोज ||
आळस हा शत्रू | आहे माणसाचा |
बदलतो साचा | जिवनाचा ||
चांगल्या सवयी | तेवढे चांगले |
होईल गा भले | आयुष्याचे ||
सोड रे व्यसन | व्याधी आमंत्रण |
शरीर खंगून | जाईल गा ||
सात्विक आहार | निरोगी आयुष्य ||
उद्याचे भविष्य | आयुष्याचे ||
प्रसन्न मनाने | रहा दिनभर |
नको चिंतातूर | आयुष्यात ||
मानवाचा जन्म | सुंदर ही भेट |
देवाने ही थेट | दिली आहे ||
गोळ्या व औषधी | खरे शत्रू आहे |
डोकावून पाहे | जीवनात ||
निरोगी जीवन | स्वस्थ जगूयात |
रोगावर मात | करूयात ||
ताजे खाणेपिणे |उत्तम आहार |
कामं अंगभर | करूनिया ||
मिनू म्हणे आता | ठेव सर्व ध्यानी |
नको मनमानी | आपुलीच ||
दिर्घायुष्यी जगा | नियम हे पाळा |
आयुष्य झोपाळा | आहे बघ ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
मो.९७६७६६३२५७
No comments:
Post a Comment