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Monday, January 30, 2023

हुंडाबंदी (अभंग क्र.४३)

 हुंडाबंदी (अभंग क्र.४३)

हुंडाबंदी फक्त| म्हणायपुरती |
किती बळी जाती | आज पण ||

कडक कायदा | चालूच पध्दत |
हुंडा हो घेतात | लपवून ||

कारवाई करा | शिक्षा द्या कठोर |
लोकांच्या समोर | येऊ द्यावे ||

झाकून घेतात | आज सुध्दा हुंडा |
घालतात गंडा | वरपिता ||

जनजागृतीची | काढावी मोहीम |
उपाय जालीम | जणू काही ||

सर्वांनी ठरवा | ना घेणार हुंडा |
ना देणार हुंडा | प्रत्येकाने ||

हुंडाबळी आज | जातातच मुली |
जिवानिशी मुली | जात आहे ||

कित्येक ठरल्या | हुंड्याचा शिकार |
लक्ष सरकार | द्यावे जरा ||

घातक ह्या रूढी | मोडून काढूया |
पध्दत मोडूया | समाजात ||

हे शहाणपण | कुणी शिकविले ||
घर बुडविले | गरिबांचे ||

पोरीच्या बापाला | रात्रंदिन घोर |
हुंडा शिरजोर | करू लागे ||

कर्जाचा डोंगर | विकी घरदार |
मोडला संसार | वधुपिता ||

कंबर मोडली | सावकारी कर्ज |
करीतसे अर्ज | कितीवेळा ||

घातक रूढीने | घेतला हो बळी |
हुंड्याची ही अळी | वळवळे ||

करी आत्महत्या | पोरीच्या बापाने |
बळी ह्या हुंड्याने | घेतलासे ||

कित्येक ठिकाणी | होतसे हो छळ |
पडली का कळ | समाजास ||

जनजागृतीचा | आहे रे आभाव |
करूया उठाव | विरोधात ||

मिनू म्हणे आता | शासन कायदा |
कडक कायदा | लक्ष द्यावे ||

कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव

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