कधी माणसाने | सोडू नये निती |
लोकांस प्रचिती | असतेच || १||
वंशावळ खोटी| खोटेची करिती |
जगा दाखविती | मोठेपण || २ ||
जग हे शहाणे | ओळखती सारे |
हव्यासाचे वारे | सुटलेले || ३||
शहाण्याला असे | शब्दांचा मार |
मुर्खाचा बाजार | मांडलासी || ४ ||
काय तुझी निती | केलास कचरा |
माणूस ना बरा | दिसलासी || ५ ||
आपुल्या हाताने | दगड घातला |
मनात सलला | आंतरीक || ६ ||
खोटेपण दिसे | लोकं ही हुशार|
मानवा लाचार | का झालास || ७ ||
अतिहव्यासाचे | रे दुष्परिणाम |
करी घामाघाम | निर्लज्जास || ८ ||
सत्याचे हे सार | सत्य जिंकतसे
नाही लपतसे | खोटेपण || ९ ||
केवढी फजिती | गध्याची होतसे |
लालसा दिसते | गाढवाला || ९ ||
गाढवास काय | गुळाची ती चव |
नाही काय भेव | आंतरिचे || २० ||
तुझे मन ग्वाही | तूच आहे चोर |
परि शिरजोर | ठरलासी || ११ ||
एकदिन ऐसा | उगवेल खास|
सत्याचीच आस | दिसेलगा || १३||
नियतीचा खेळ | आज ना उद्याला |
साथ दे न्यायाला | राहशील || १४ ||
जैसी रे करणी | वैसी रे भरणी |
डोळा येई पाणी | कळेलच || १५ ||
शब्दांचा हा मार | मुर्खास कळेना |
वळता वळेना | बुध्दीलाही || १६ ||
मिनू म्हणे आता | हो बाई सावध |
सत्याचा गे वध | होत असे || १७||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा कोकलगाव
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