एकत्र कुटुंब | सुखी परिवार |
आनंदाचे सार | ठेव ध्यानी ||१||
जावा जावा आणि |भाऊ भाऊ गोड |
नसे जगी तोड | सुखाचिया ||२||
एकमेकां राही | जीव लावुनिया |
जाई धावुनिया | संकटात ||३||
सुखी परिवार | असे जिथे नंद |
मिळतो आनंद | घरामध्ये ||४||
नंद भावजय | मैत्रिणी त्या खास |
मोग-याचा वास | जणू वाटे ||५||
सासू सासरे हे | घराचे दैवत |
नजर ठेवत | घरावरी ||६||
सदासुखी राहो | सारा परिवार |
एकतेचे सार | दिसे त्यात ||७||
वाटूनिया कामं | आनंदाने करी |
सुखाची भाकरी | गोड लागे ||८||
करता पुरुष | घराचा आधार |
सुखी परिवार | असतसे ||९||
जीव लावुनिया | रहावे आनंदे |
ना होणार वांदे | कदापिही ||१०||
एकीचे ते बळ | आहे फार मोठे |
जिवनाच्या वाटे | ठेव ध्यानी ||११|
मिनू म्हणे आता | रहावे एकत्र |
जिवनाचे सुत्र | खरेखुरे ||१२||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
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