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Saturday, January 7, 2023

मायबाप सेवा(अभंग क्र.३७)

 मायबाप सेवा (अभंग क्र.३७)

मायबाप पूजा | मायबाप सेवा
मिळेल हो मेवा जिवनात

जगी थोर आहे | मायबाप झाडं |
ते आधारवड | जीवनाचे ||

आभाळाएवढी | असे त्याची माया |
पडुनिया पाया | धन्य व्हावे ||

जिवंतपणीच | सेवा करा खूप ||
वाटते अप्रुप | जनलोकां ||

चारधाम काशी | घरातच आहे |
उघडूनिया पाहे | नेत्र तुझे ||

मायबाप पूजा | कमी ना जिवनी |
मायच धरणी | ठेव ध्यानी ||

हा जन्म लाभला | कुणामुळे आज |
जिवनाचा साज | मायबाप ||

खरे देव घरी | मायबाप देव |
ना कशाचे भेव | जीवनात ||

नकोस दुखवू | कधी मायबापा |
बघतोय बाप्पा | ठेव ध्यानी ||

आजचे जीवन | हे क्षणभंगुर |
मायबाप दूर | जाता कळे ||

सेवा कर नित्य | मायबाप श्रेष्ठ |
नको मती भ्रष्ट | करू नये ||

मायबाप सेवा | खरा परमार्थ |
जिवनास अर्थ | येई त्यांच्या |

मिनू म्हणे आता | धन्य तोच आहे |
मायबाप आहे | जीवनात ||

मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथमिक शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.
मो.९७६७६६३२५७

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