जुनी पेन्शन द्या | किती हो अन्याय |
आहे का पर्याय | सांगा तुम्ही ||
कर्मचा-यांची हो | पेन्शनच काठी |
ओलांडत साठी | मिळतसे ||
म्हातारपणाची | काठी आहे खरी ||
वेळ आज बरी | नाही नाही ||
कित्येकांचे झाले | मृत्यू अपघाती |
बायका रडती | वंचितांच्या ||
लेकराबाळांचा | शिक्षणाचा बोजा |
वाढता हो कर्जा | कैसे फेडी ||
हक्काची पेन्शन | देते का शासन |
होतसे मरण | नवलोकां ||
समान काम हो | समान वेतन |
न्याय ही समान | करावेत ||
नाही समानता | चिंतीत नोकरी |
करीतो चाकरी | पोटासाठी ||
पेन्शन आधार | खरा वार्धक्याचा |
विचार मनाचा | थोडा करा ||
शासन निर्णय | बदलून टाका |
जुनीच पेन्शन | आहे बाका ||
कंबर मोडले | करू आंदोलन |
आक्रोश गुंदन | कितीवेळा ||
जाग हो शासना | चांगला विचार |
नोकर लाचार | झाला आज ||
वाढे महागाई | पगार पुरेना |
जाग रे शासना | येऊ देत ||
मिनू म्हणे आता | लागावी पेन्शन ||
उगाच टेन्शन | कर्मचारी ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
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