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Thursday, February 9, 2023

जुनी पेन्शन द्या (अभंग क्र.४६)

 जुनी पेन्शन द्या (अभंग क्र.४६)

जुनी पेन्शन द्या | किती हो अन्याय | 
आहे का पर्याय | सांगा तुम्ही ||

कर्मचा-यांची हो | पेन्शनच काठी |
ओलांडत साठी | मिळतसे ||

म्हातारपणाची | काठी आहे खरी ||
वेळ आज बरी | नाही नाही ||

कित्येकांचे झाले | मृत्यू अपघाती |
बायका रडती | वंचितांच्या ||

लेकराबाळांचा | शिक्षणाचा बोजा |
वाढता हो कर्जा | कैसे फेडी ||

हक्काची पेन्शन | देते का शासन |
होतसे मरण | नवलोकां ||

समान काम हो | समान वेतन |
न्याय ही समान | करावेत ||

नाही समानता | चिंतीत नोकरी |
करीतो चाकरी | पोटासाठी ||

पेन्शन आधार | खरा वार्धक्याचा |
विचार मनाचा | थोडा करा ||

शासन निर्णय | बदलून टाका |
जुनीच पेन्शन | आहे बाका ||

कंबर मोडले | करू आंदोलन |
आक्रोश गुंदन | कितीवेळा ||

जाग हो शासना | चांगला विचार |
नोकर लाचार | झाला आज ||

वाढे महागाई | पगार पुरेना |
जाग रे शासना | येऊ देत ||

मिनू म्हणे आता | लागावी पेन्शन ||
उगाच टेन्शन | कर्मचारी ||

कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम

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