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Saturday, March 4, 2023

स्त्रीयांचे शिक्षण (अभंग क्र.४८)

 स्त्रीयांचे शिक्षण (अभंग क्र.४८)

स्त्रीयांचे शिक्षण | प्रगत लक्षण|
सुधारी जीवन | सर्वांचिया |

समस्त स्त्रीयांनी | शिक्षण हो घ्यावे |
प्रगत बनावे | जीवनात ||

व्यापून टाकले | सारे क्षेत्र आज |
प्रगतीचा साज | चढलासे ||

 स्त्रीशिक्षणाचे बी | साऊने रोवले|
बीज अंकुरले | आज सारे ||

शिकल्या हो मुली | काळोख संपला |
बदल होत झाला | शिक्षणाने ||

सुधारली मती | नोकरी लागल्या |
स्त्रीयाही जागल्या | शिक्षणाने ||

व्यापूनी टाकले | प्रत्येक हो क्षेत्र |
ठरल्या रे पात्र | सा-या मुली ||

शिकल्या टिकल्या | वाचले पुस्तक |
सुधारे मस्तक | शिक्षणाने||

वाघिणीचे दूध| शिक्षण रे आहे |
स्वावलंबी राहे | समस्त स्त्री ||

सबला बनल्या | झाल्या कलेक्टर
सांभाळी पदर | मातृत्व ही ||

ज्योती साऊचेच | आज उपकार |
स्वप्न गे साकार | कर तुझे ||

मिनू म्हणे हर | कर तू काबीज |
होऊ दे गे चीज| जीवनाचे ||


कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
ता.जि.वाशिम

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