स्वप्नाची दुनिया | दुनियेत मग्न |
करूनिया लग्न | होत असे ||
बदलती मुलं | लग्न झाल्यावर |
येते जिवावर | मायबाप ||
दुनियेत गुंग | विसरती आप्त |
कर्तव्य ते लुप्त | करूनिया ||
एकत्र कुटुंब | विसरले सारे |
विभक्ताचे वारे | वाहू लागे ||
पत्नी आल्यावर | मायबाप जड |
हाडाची त्या काड | करूनिया ||
पोटचा तो गोळा | विभक्त राहतो |
गुणगान गातो | जगाचिया ||
पत्नी आल्यावर | विसरी बहीण ||
ती पाठराखीण | असे खरी ||
जाणा मायबाप | खरी ईशसेवा |
मिळेल हो मेवा | जिवनात ||
लावावे हो जीव | करावे चांगले |
होईल हो भले | माणसाचे ||
आनंदाने ठेवा | ह्या मायबापांना |
मुक्ती त्या पापांना | मिळेल गा ||
ईषरूपी असे | तुझे मायबाप |
पुण्य ते अमाप | कर्तव्याने ||
मिनु म्हणे आता | कर्तव्य हो श्रेष्ठ |
नितीमत्ता भ्रष्ट | नको करू ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
ता.जि.वाशिम
No comments:
Post a Comment