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Saturday, April 1, 2023

स्वप्नांची दुनिया (अभंग क्र.४९)

 स्वप्नाची दुनिया (अभंग क्र.४९)

स्वप्नाची दुनिया | दुनियेत मग्न |
करूनिया लग्न | होत असे ||

बदलती मुलं | लग्न झाल्यावर |
येते जिवावर | मायबाप ||

दुनियेत गुंग | विसरती आप्त |
कर्तव्य ते लुप्त | करूनिया ||

एकत्र कुटुंब | विसरले सारे |
विभक्ताचे वारे | वाहू लागे ||

पत्नी आल्यावर | मायबाप जड |
हाडाची त्या काड | करूनिया ||

पोटचा तो गोळा | विभक्त राहतो |
गुणगान गातो | जगाचिया ||

पत्नी आल्यावर | विसरी बहीण ||
ती पाठराखीण | असे खरी ||

जाणा मायबाप | खरी ईशसेवा |
मिळेल हो मेवा | जिवनात ||

लावावे हो जीव | करावे चांगले |
होईल हो भले | माणसाचे ||

आनंदाने ठेवा | ह्या मायबापांना |
मुक्ती त्या पापांना | मिळेल गा ||

ईषरूपी असे | तुझे मायबाप |
पुण्य ते अमाप | कर्तव्याने ||

मिनु म्हणे आता | कर्तव्य हो श्रेष्ठ |
नितीमत्ता भ्रष्ट | नको करू ||

कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
ता.जि.वाशिम

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