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Saturday, April 1, 2023

प्रभू जय सिताराम (अभंग क्र.५२)

 प्रभू जय सिताराम(अभंग क्र.५२)

अयोध्येचा राजा | जय हो श्रीराम |
मुखी रामराम | जनाचिया ||

आदर्श तो राजा | वचन ते थोर |
कौशल्याचा पोरं | दयावान ||

 दशरथ राजा | ज्येष्ठ पुत्र राम |
अयोध्या हे धाम | पुज्यनीय ||

एकवचनी ते | रामाचा तो त्याग |
वनवास भाग | नशिबात ||

राम लक्ष्मण ह्या | बंधुचे जे प्रेम |
भरताचे सेम | बंधुप्रेम ||

सितेची कहाणी | फिरे अनवाणी |
विरहाचे पाणी | डोळ्यांमधी ||

त्यागाचे प्रतीक | आदर्श तो राजा |
रावणास सजा | आपसुक ||

गर्वाचे हरण | गर्विष्ठ रावण |
पतीत पावण | सिताराम ||

चौदा वर्ष भोग | कसा वनवास |
त्रास भोगलास | किती देवा |

देवादिकासही | होता ना हो त्रास |
सत्याची ती कास | सोडली ना ||

संकटात नाम | घ्यावे मुखी राम | 
बोला रामराम | नियमित ||

मिनू म्हणे आता | आठवावे रूप | 
आज्ञा स्वरुप | प्रभू राम ||

कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.

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