शंभू महादेवा (अभंग क्र.१७)*
त्रिशूळ डमरू | घेऊनिया हाती |
सोबती पार्वती | महादेवा ||
समुद्र मंथन | विष हो प्राशिले |
हाकेस धावले | देवतांच्या ||
निळकंठ नाम | उदयास आले |
महादेव बोले | पाठीराखा ||
संकटमोचक | शंभू महादेव |
नाही कधी भेव | भक्तालागी ||
ॐ नमः शिवाय | करूयात जप |
आरती व धूप | आवडीचे ||
पांढरा धोतरा | आवडीचे फूल |
अंगीवरी झूल | नंदीच्याही ||
वाघांचे कातडे | देवाचे आसन |
करितो वंदन | महादेवा ||
नंदीवर स्वार | कैलास पर्वत |
पार्वती सोबत | असे सदा ||
भक्ताच्या पाठीशी | राही महादेव |
कशास रे भेव | तुज भक्ता ||
मिनू म्हणे आता | शंभू महादेवा |
धावा तूम्ही घ्यावा | भक्ताचिया ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम