*स्थापू समानता(अभंग क्र.१६)
स्थापू समानता | मिटवूया दरी |
नको सल उरी | कसलीही ||
स्त्रीपुरूष चाके | संसाररथाची |
साथ एकोप्याची | असू द्यावी ||
काळा आणि गोरा | नको भेदभाव |
मन ही पहावं | तपासूनी ||
एकाच देवाची | लेकरे हो सारी |
जन्माची ही वारी | बा विठ्ठला ||
गरीब-श्रीमंत | मिटवूया दरी |
भावना ही बरी | असू द्यावी ||
उच-निच नाही | जगात या कोणी |
समतेची गाणी | गावूयात ||
सानथोर सारे | ठेवा एक ध्यानी |
नको मनमानी | आपुलीच ||
जात धर्म पंथ | मानवाने केले |
वर्ण ही निर्मिले | स्वार्थापोटी ||
सोडून द्या सारे | स्थापू समानता |
मानवी एकता | जोडू चला ||
मिनु म्हणे आता | धाव बा विठ्ठला |
विनविते तुला | पांडुरंगा ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्रा.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
No comments:
Post a Comment