*नको भ्रष्टाचार(अभंग क्र.१५)
नको भ्रष्टाचार | ठेवा शिष्टाचार |
चांगले आचार | जिवनात ||
राजकारणात | खोटी अश्वासने |
जिंकतात मने | लोकांचे हो ||
फसवाफसवी | वाढत चालली|
जनता भुलली | प्रलोभनी ||
नविन योजना | ती कागदावरी |
बोलतो पुढारी | नेटानेच ||
रस्त्यात हो खड्डे| खड्ड्यांचा रे देश|
पुढा-याचा जोश |वाढतोच ||
टेबलाखालून | घेतात रे नोटा |
तुडवीतो वाटा | भ्रष्टाचारी ||
इडीची चौकशी | लपविती धन
सैरभैर मन | आपसूक ||
रस्त्यात घोटाळा | निधीत घोटाळा |
धंदाच हो काळा | फसव्यांचा ||
शरीफ ते चोर | वर शिरजोर|
हे हरामखोर | असतात||
मिनु म्हणे आता | चुकीचं वागणं|
कुत्र्याचं जगणं | सोडा सोडा ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम
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