पुण्याईने मिळे | जन्म मानवाचा |
अर्थ जिवनाचा | कळला का ||
व्यर्थ जाऊ नये | जन्म हा आपुला ||
माणूस तो भला | समजावा ||
किर्तीरूपे झिज | चंदनासमान |
जणू तू सूमन | सुवासिक ||
येईल सुगंध | संस्कार सुरेख |
कर तू पालक | स्वतः चीही ||
जाता जाता थोडे | पुण्य ठेव मागे |
सुखाचे ते धागे | हाती लागे ||
लोभ,राग, द्वेष | दे रे सोडूनिया |
मर्म जाणुनिया | घे माणसा ||
सोबत संगत | चांगली असावी |
छबी ती दिसावी | ईशरूपी ||
चांगले चिंतन | असू दे रे मनी |
सुखाची पर्वणी | तूज मिळे ||
सत्कर्म करावे | कष्ट उपसावे |
प्रेमाने रहावे | जिवनात ||
मिनू म्हणे आता | चांगले ते घ्यावे |
आनंदी रहावे | जिवनात ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम.