हुंडाबंदी फक्त| म्हणायपुरती |
किती बळी जाती | आज पण ||
कडक कायदा | चालूच पध्दत |
हुंडा हो घेतात | लपवून ||
कारवाई करा | शिक्षा द्या कठोर |
लोकांच्या समोर | येऊ द्यावे ||
झाकून घेतात | आज सुध्दा हुंडा |
घालतात गंडा | वरपिता ||
जनजागृतीची | काढावी मोहीम |
उपाय जालीम | जणू काही ||
सर्वांनी ठरवा | ना घेणार हुंडा |
ना देणार हुंडा | प्रत्येकाने ||
हुंडाबळी आज | जातातच मुली |
जिवानिशी मुली | जात आहे ||
कित्येक ठरल्या | हुंड्याचा शिकार |
लक्ष सरकार | द्यावे जरा ||
घातक ह्या रूढी | मोडून काढूया |
पध्दत मोडूया | समाजात ||
हे शहाणपण | कुणी शिकविले ||
घर बुडविले | गरिबांचे ||
पोरीच्या बापाला | रात्रंदिन घोर |
हुंडा शिरजोर | करू लागे ||
कर्जाचा डोंगर | विकी घरदार |
मोडला संसार | वधुपिता ||
कंबर मोडली | सावकारी कर्ज |
करीतसे अर्ज | कितीवेळा ||
घातक रूढीने | घेतला हो बळी |
हुंड्याची ही अळी | वळवळे ||
करी आत्महत्या | पोरीच्या बापाने |
बळी ह्या हुंड्याने | घेतलासे ||
कित्येक ठिकाणी | होतसे हो छळ |
पडली का कळ | समाजास ||
जनजागृतीचा | आहे रे आभाव |
करूया उठाव | विरोधात ||
मिनू म्हणे आता | शासन कायदा |
कडक कायदा | लक्ष द्यावे ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे