*पक्ष फोडाफोडी (अभंग क्र.५५)*
राजकारणात | पक्ष फोडाफोडी |
मतलबी गोडी| वाढतसे ||
एकाच माळेचे | सर्वच पुढारी |
पत्करी लाचारी | सत्तेपायी ||
पक्षाचा हो घात | करी फोडाफोडी|
दिसते लबाडी | जनतेस ||
आपमतलबी | सब बारा टक्के |
मारतसे शिक्के | आपापले ||
आपापली सोय | शेकतसे पोळी |
देऊनिया टाळी | एकमेका ||
शेतकरी राजा | असे संकटात |
कळती का हाक | नेत्यालोकां ||
नविन योजना | फिरते कागदी ||
लाच ती नगदी | मिळवती ||
दहा पिढ्या खाती | गोळा करी धन |
पुढा-याचं मन | संकुचित ||
शिक्षकांना करा | चालू हो पेन्शन |
|कशापायी टेन्शन | देत असे |
सत्तेपायी करी | पक्ष फोडाफोडी |
विस्कळीत घडी | करतसे| |
ताकाचे ते लोणी | खाण्या टपकती |
सदा एक होती | सत्तेपायी ||
मिनु म्हणे आता | जाग लोकशाही |
आनंदात राही | जनताही ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
ता.जि.वाशिम