माझा बळीराजा (अभंग क्र.४)
राबराब राबी | माझा बळीराजा ||
कोणती ही सजा | उपभोगी || १||
हवालदिल रे | जगाचा पोशिंदा ||
नाही भाव कांदा | चिंतातूर || २||
शेतकरी राजा | पिकेना रे शेती ||
काळी काळी माती | माझी माय ||३||
अवर्षण यंदा | काडीमोल भाव ||
सांगा कुठं जाव | शेतकरी ||४||
महागाई खूप | बियाणे महाग|
कसा काढू राग | सांग गड्या ||५||
यंदा हो लगीन | थोरली ही पोरं |
लागला हो घोर | जिवा माझ्या ||६||
कसं उजवावं | का कर्ज फेडावं ||
कसं रे जगावं | कळेनाच ||७||
शासनाला जाग | कधी रे येईल ||
निल रे होईल | कर्ज सारं ||८||
ऐक पांडुरंगा | बळीची रे हाक||
संसाराच चाक | फिरव गा ||९||
मिनू म्हणे आता | पिकू दे शिवार ||
उचल हा भार | पांडुरंगा ||१०||
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्राथ.शाळा.कोकलगाव
ता.जि.वाशिम