मनाचे मळभ | करूयात दूर|
जायचे हो भूर्र | एकदिनी ||
आहे तोपर्यंत | आनंदाने जगा |
उगाचच त्रागा | कशापायी ||
निर्मळ मनाने | राहील जो आज |
दिर्घायुष्यी साज | मिळे तया ||
नको जळमटे | पवित्र हे मन |
देवाचेच धन | आहे बघ ||
मनमंदिरात | भगवंत वास |
लाभे सहवास | ठेव ध्यानी ||
आपण सारेच | ईशरूपी पक्षी |
आत्मा आहे साक्षी | प्रत्येकाचा ||
मनातली घाण | काढुनिया टाक |
स्वतःचाच धाक | असू द्यावा ||
निर्मळ मनाने | आनंदे भरीन |
जगण्याचा शीण | जाईल गा ||
मनाची श्रीमंती | जया वसतसे |
निर्मळ होतसे | मन त्याचे ||
दूर फेकुनिया | मनातली घाण |
स्वच्छ आणि छान | ठेव मन ||
मिनू म्हणे आता | खरेखुरे धन |
माणसाचे मन | ठेव ध्यानी ||
कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.प.प्रा.शाळा.कोकलगाव